इस्लामाबाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इन दिनों विपक्ष के जबरदस्त विरोध का सामना कर रहे हैं। अपनी कुर्सी को बचाने के लिए इमरान अब सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई का सहारा ले रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान के दौरे पर पहुंचे इमरान खान ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर ये चोर (विपक्ष) प्रमुख और इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के चीफ की आलोचना कर रहा है। इससे साबित होता है कि उन्होंने इन पदों के लिए सही लोगों को चुना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाषा बोल रहा है। पर साधा निशाना बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और इस समय लंदन में भगोड़े की जिंदगी जी रहे नवाज शरीफ अपने भाषणों में कई बार पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद पर खुलकर निशाना साधा था। नवाज ने अपनी सरकार को गिराने के लिए इन दोनों पर साजिश रचने का भी आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि 2018 के चुनाव में मुझे सत्ता से बेदखल कर सेना ने अक्षम इमरान खान को प्रधानमंत्री बनवाया था। इमरान का आरोप- मोदी की भाषा बोल रहा विपक्ष इन दिनों पाकिस्तान में पीएमएमएल-एन के नेता अयाज सादिक के बयान पर भी बवाल मचा हुआ है। उन्होंने भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन के रिहा करने को लेकर पाकिस्तान की पोल पूरी दुनिया के सामने खोल दी थी। जिसके बाद उनके बयान पर इमरान के कई मंत्रियों ने उन्हें भारत का एजेंट बता दिया था। अब इमरान खान ने उनके बयान पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि विपक्षी नेता भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाषा बोल रहे थे। मुझे ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा विपक्ष इमरान खान ने दावा किया कि मुझे दुनिया भर के नेताओं से बधाई संदेश मिले कि कैसे पाकिस्तान ने पुलवामा के बाद खुद को संभाला और जवाबी कार्रवाई की, और आज वह (सादिक) कह रहा है कि पाकिस्तान ने डर से रिहाई की। जो मोदी के पूरे चुनाव अभियान का आधार था। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष का इसके पीछे का पूरा उद्देश्य इमरान खान को ब्लैकमेल करना है ताकि वह अपनी लूटी हुई संपत्ति को पा सकें। इसलिए सेना को निशाना बनाया जा रहा पाकिस्तानी पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं आज अपने राष्ट्र को बताना चाहता हूं कि इमरान खान इन डकैतों को कभी माफ नहीं करेगा। जिस तरह से उन्होंने न्यायपालिका पर हमला किया। वे न्यायधीशों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद जब वे विदेश भाग जाते हैं। जिस मामलों में उनके पक्ष में फैसला आ जाता है तो न्यायपालिका सही है और खिलाफ आता है तो न्यायपालिका गलत है। वे सेना पर दबाव केवल इसलिए डाल रहे हैं ताकि हम उन्हें माफ कर दें।
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